उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaj o nala sharar-bar ho tasir ke sath

आज ओ नाला शरर-बार हो तासीर के साथ

آج او نالہ شرر بار ہو تاثیر کے ساتھ

शायर: Nadir Kakorvi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आज ओ नाला शरर-बार हो तासीर के साथ
हम ने मैदान बदा है फ़लक-ए-पीर के साथ

देखना ये है कि मय-ख़ाने से निकले क्यूँ-कर
शैख़ आए तो बड़ी 'इज़्ज़त-ओ-तौक़ीर के साथ

आप ने दे के सज़ा और बढ़ा दी जुरअत
ख़ौफ़-ए-ता'ज़ीर भी दिल से गया ता'ज़ीर के साथ

दिल को इस दर्जा तिरी ज़ुल्फ़ से रग़बत क्यों है
क्यों नहीं उस को मिरे पाँव की ज़ंजीर के साथ

साथ ही ज़िंदा-दिली के गया दिल भी अपना
शम' महफ़िल से गई शम' की तनवीर के साथ

'अक्स लेने में उठा देते हैं मुझ को कि नहीं
मेरी तस्वीर भी खिंच जाए न तस्वीर के साथ

दश्त-ए-वहशत में बगूलों का तमाशा आहा
नाच उन का वो मिरे नग़्मा-ए-ज़ंजीर के साथ

जाने किस जाल में कम-बख़्त रहा उस में असीर
पड़ गई दिल में गिरह ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर के साथ

पैरवी है उसी मरहूम की 'नादिर' वर्ना
शा'इरी कहते हैं जिस को वो गई 'मीर' के साथ