उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shahr-e-suKHan mein aaj akeli chali gai

शहर-ए-सुख़न में आज अकेली चली गई

شہر سخن میں آج اکیلی چلی گئی

शायर: Nadeem Malik6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शहर-ए-सुख़न में आज अकेली चली गई
ख़ुशबू के साथ साथ चँबेली चली गई

मैसेज का देर तक न कोई जब मिला जवाब
मा'लूम हो गया कि हवेली चली गई

शादी के वक़्त फिर से क़यामत बपा हुई
ख़ाली फिर आज उस की हथेली चली गई

फिर आज कोई मर गया फिर शोर मच गया
फिर आज हुक्मरान की रैली चली गई

फिर यूँ हुआ कि ज़ब्त मुसीबत में ढल गया
जब वक़्त-ए-वस्ल उस की सहेली चली गई

पहले वो मेरे साथ रही देर तक 'नदीम'
फिर हादसाती तौर पे खेली चली गई