उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shahr-e-gham ki tamam galiyon mein

शहर-ए-ग़म की तमाम गलियों में

شہر غم کی تمام گلیوں میں

शायर: Nadeem Malik7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शहर-ए-ग़म की तमाम गलियों में
कर रहा हूँ कलाम गलियों में

आ गया हूँ मैं लौट कर घर से
कीजिए एहतिमाम गलियों में

क्या तुझे 'इल्म ही नहीं है दोस्त
ख़ास होते हैं 'आम गलियों में

आज वो हो गए फ़ना-फ़िल्लाह
लग गए जिन के दाम गलियों में

फिर मुलाक़ात हो नहीं सकती
आख़िरी है क़ियाम गलियों में

पाँव में डाल कर तिरी ज़ंजीर
फिर रहा है ग़ुलाम गलियों में

है नज़र-बाज़ आदमी वो 'नदीम'
कर रहा है जो शाम गलियों में