उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shayad tujhe sukun mile dekh kar to dekh

शायद तुझे सुकून मिले देख कर तो देख

شاید تجھے سکون ملے دیکھ کر تو دیکھ

शायर: Vibha Jain 'Khwaab'5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शायद तुझे सुकून मिले देख कर तो देख
हम ख़त्म हो रहे हैं हमें इक नज़र तो देख

मंज़िल नज़र में है न कोई हम-सफ़र है साथ
नाकाम-ए-आरज़ू का ये ज़ौक़-ए-सफ़र तो देख

सीने में इज़्तिराब लबों पर हँसी लिए
मर-मर के जी रहे हैं हमारा हुनर तो देख

ये क्या कि छोड़ दी यूँही तख़्लीक़ कर के बस
कुछ और चाहती है ये दुनिया इधर तो देख

ख़ुद हुस्न भी है इश्क़ की बर्बादी पर निसार
देखा नहीं है शम्अ को बुझते अगर तो देख