उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shayad aisa shaKHs hamara pura KHwab kare

शायद ऐसा शख़्स हमारा पूरा ख़्वाब करे

شاید ایسا شخص ہمارا پورا خواب کرے

शायर: Zafar Siddiqui7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शायद ऐसा शख़्स हमारा पूरा ख़्वाब करे
पत्थर को जो मोम बनाए आहन आब करे

उस बादल की आस लगाए बैठे हैं सब लोग
दिल की खेती छोड़ के जो जंगल सैराब करे

दरिया दरिया तूफ़ाँ अपना कर जाता है काम
साहिल ज़द में आ जाए तो क्या गिर्दाब करे

मेरी बस्ती में रहते हैं कुछ फ़िरऔन-सिफ़त
उस की मर्ज़ी ज़िंदा रक्खे या ग़र्क़ाब करे

ऐसी भी क्या याद कि आँखें हो जाएँ पुर-नम
ऐसा भी क्या दर्द कि हर पल दिल बेताब करे

उस की दूरी आग लगाए तन-मन के अंदर
उस का मिलना सूखे जज़्बे को शादाब करे

इक ज़र्रे को सूरज करने में क्या देर 'ज़फ़र'
वो चाहे तो सात समुंदर को पायाब करे