उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jis taraf jaiye milte hain adawat wale

जिस तरफ़ जाइए मिलते हैं अदावत वाले

جس طرف جائیے ملتے ہیں عداوت والے

शायर: Zafar Siddiqui8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस तरफ़ जाइए मिलते हैं अदावत वाले
उठ गए दुनिया से क्या लोग मोहब्बत वाले

दोस्तो तुम हो अगर चश्म-ए-इनायत वाले
हम भी कुछ कम नहीं ख़ुद्दार तबीअत वाले

अपने हाथों से बनाते हैं मुक़द्दर अपना
गर्दिश-ए-वक़्त से डरते नहीं हिम्मत वाले

मौज साहिल का भी सर तोड़ के रख देती है
क्या समझते हैं ग़रीबों को ये दौलत वाले

जितने बौने थे उन्हें तमग़ा-ओ-ए'ज़ाज़ मिला
और चुप रह गए ऊँचे क़द-ओ-क़ामत वाले

इब्तिदा ही में ये वहशत ये बदन में लर्ज़िश
मरहले और भी आएँगे मुसीबत वाले

मंज़िल-ए-दार पे इक मैं ही अकेला पहुँचा
घर से निकले थे बहुत शौक़-ए-शहादत वाले

तल्ख़ बातों को भी सह लेते हैं चुप-चाप 'ज़फ़र'
मुँह कमीनों से लगाते नहीं इज़्ज़त वाले