उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sham ke baad hum kidhar jaen

शाम के बा'द हम किधर जाएँ

شام کے بعد ہم کدھر جائیں

शायर: Deepak Kamil9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शाम के बा'द हम किधर जाएँ
रात की गोद में न मर जाएँ

ज़िंदगी ये कहे इधर जाएँ
दिल ये कहता है के उधर जाएँ

और लाखों सितम हैं करने को
न कहो बे-घरों से घर जाएँ

आप हर दम सही हैं चाहे आप
अपनी ही बात से मुकर जाएँ

चाँद-रातें सवाल पूछेंगी
छत पे जाएँ तो सोच कर जाएँ

'उम्र भर शे'र ही कहे हम ने
अब ये मुश्किल है कि सुधर जाएँ

ये भी मुमकिन है दुख से ज़िंदा हैं
ये भी मुमकिन है सुख से मर जाएँ

ख़ुद से मिलने का वक़्त आया है
कोई बतलाओ हम किधर जाएँ

जिन को अपनी ही सुध नहीं 'कामिल'
क्या भला उन की बात पर जाएँ