उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sawal karti hui raat ke alawa hai

सवाल करती हुई रात के 'अलावा है

سوال کرتی ہوئی رات کے علاوہ ہے

शायर: Danish Hayat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सवाल करती हुई रात के 'अलावा है
कि मुझ में कोई मिरी ज़ात के 'अलावा है

ये अश्क और किसी 'इश्क़ की करामत हैं
ये मात और किसी मात के 'अलावा है

ये कौन कुन की हक़ीक़त बता रहा है मुझे
ये किस का हाथ मुनाजात के 'अलावा है

मुझे ख़बर है कि गर्दिश में हैं ये कौन-ओ-मकाँ
मगर यहाँ कोई दिन रात के 'अलावा है

ये आस पास का सारा 'इलाक़ा है घायल
कि दिल का ख़ित्ता मज़ाफ़ात के 'अलावा है

ये अंदरूँ की चमक है कि है यद-ए-बैज़ा
कि इस में जो है करामात के 'अलावा है