उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sawad-e-sham se Darta hua main

सवाद-ए-शाम से डरता हुआ मैं

سواد شام سے ڈرتا ہوا میں

शायर: Vikas Sharma Raaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सवाद-ए-शाम से डरता हुआ मैं
फिर अपने आप में सिमटा हुआ मैं

किनारे तोड़ कर बहने लगा हूँ
समुंदर की तरफ़ बढ़ता हुआ मैं

वही दीवानगी ही काम आई
अचानक हँस पड़ा रोता हुआ मैं

ख़लाओं में भटकता फिर रहा हूँ
मदार-ए-ज़ात से उतरा हुआ मैं

फिर अज़ली नींद से टकरा गया हूँ
सदा-ए-ग़ैब से जागा हुआ मैं