उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sar pe dast-e-dua charagh ka hai

सर पे दस्त-ए-दु'आ चराग़ का है

سر پہ دست دعا چراغ کا ہے

शायर: Nadeem Najid8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सर पे दस्त-ए-दु'आ चराग़ का है
ये भी इक मो'जिज़ा चराग़ का है

ये जो रौशन हैं ख़ाल-ओ-ख़द मेरे
मुझ से इक राब्ता चराग़ का है

हुक्म ये है कि नंगे-पाँव चलो
क्यूँकि ये रास्ता चराग़ का है

रौशनी अब मुझे गले से लगा
और तुझे वास्ता चराग़ का है

ये जो रौशन है आँख चेहरे पर
अस्ल में आबला चराग़ का है

या तो ये दास्तान है उस की
या कोई वाक़ि'आ चराग़ का है

आज फिर उस का सामना है और
दरमियाँ फ़ासला चराग़ का है

रोज़ जलता है रोज़ बुझता है
किस क़दर हौसला चराग़ का है