उर्दू शायरी · ग़ज़ल

samajh ke soch ke Dharre badal diye jaen

समझ के सोच के ढर्रे बदल दिए जाएँ

سمجھ کے سوچ کے ڈھرے بدل دئے جائیں

शायर: Vijay kumar Swarnkar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

समझ के सोच के ढर्रे बदल दिए जाएँ
अब इंक़लाब के नुस्ख़े बदल दिए जाएँ

सब अपनी अपनी किताबें सँभाल कर रखिए
कहीं ये हो न कि पन्ने बदल दिए जाएँ

अब इन में कुछ खुली आँखें दिखाई पड़ती हैं
पुराने पड़ चुके पर्दे बदल दिए जाएँ

तुम आदमी हो ये ए'लान क्यों नहीं करते
उन्हें सनक है कि खूंटे बदल दिए जाएँ

मदद की शर्त अगर है कि ये अमीर लगे
तो आओ लाश के कपड़े बदल दिए जाएँ

उसे बताओ कि सैलाब चार दिन का है
नदी है ज़िद पे किनारे बदल दिए जाएँ