उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har nai ijad ki kal tak hamin buniyaad the

हर नई ईजाद की कल तक हमीं बुनियाद थे

ہر نئی ایجاد کی کل تک ہمیں بنیاد تھے

शायर: Vijay kumar Swarnkar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर नई ईजाद की कल तक हमीं बुनियाद थे
लोग लोहा भी न थे जिस वक़्त हम फ़ौलाद थे

आज ही तय कीजिए कल क्या कहेंगे क़ौम को
हम अभी आज़ाद हैं या हम कभी आज़ाद थे

झर चुके पत्ते हवा से कह रहे हैं ग़म नहीं
वो जड़ें ज़िंदा हैं अब भी जिन से हम आबाद थे

कौन सुनता अजनबी की अजनबी भाषा में बात
शोर के दरबार में हम मौन के संवाद थे