उर्दू शायरी · ग़ज़ल

roken na apni fikr ko patjhaD ke aas-pas

रोकें न अपनी फ़िक्र को पतझड़ के आस-पास

روکیں نہ اپنی فکر کو پت جھڑ کے آس پاس

शायर: Vijay kumar Swarnkar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रोकें न अपनी फ़िक्र को पतझड़ के आस-पास
दीमक लगी हुई है हर इक जड़ के आस-पास

वो बे-धड़क घरों में भी आएँगे एक दिन
जो ख़ौफ़ लामबंद हैं नुक्कड़ के आस-पास

ऐ खुरदुरे समय न कोई बोझ दिल में रख
गुज़री है ज़िंदगी मिरी बीहड़ के आस-पास

धरना न दे तो क्या करे पानी गली-गली
कितने मकान बन गए जौहड़ के आस-पास