उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chahta hai koi agar uDna

चाहता है कोई अगर उड़ना

چاہتا ہے کوئی اگر اڑنا

शायर: Vijay kumar Swarnkar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चाहता है कोई अगर उड़ना
तो ज़रूरी है उस का डर उड़ना

भीड़ भारी है सारी सड़कों पर
सीख लें शहर में बशर उड़ना

ये तो 'आदत नहीं परिंदों की
दिन में आराम रात-भर उड़ना

मेरी खिड़की से तुम नज़र आओ
जब भी उड़ना ये सोच कर उड़ना

आब-ओ-दाने की फ़िक्र कर प्यारे
छोड़ दे ये इधर उधर उड़ना