उर्दू शायरी · ग़ज़ल

safar ki zulmaton mein ye sitara chahiye mujhko

सफ़र की ज़ुल्मतों में ये सितारा चाहिए मुझ को

سفر کی ظلمتوں میں یہ ستارہ چاہیے مجھ کو

शायर: Babar Zuhrab8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सफ़र की ज़ुल्मतों में ये सितारा चाहिए मुझ को
अभी तेरी मोहब्बत का सहारा चाहिए मुझ को

कोई ताज़ा बहुत ताज़ा नज़र का ज़ाविया मिल जाए
कोई रौशन बहुत रौशन नज़ारा चाहिए मुझ को

मिरे अल्फ़ाज़ की झोली कहीं ख़ाली न रह जाए
ये जो सरमाया-ए-ग़म है ये सारा चाहिए मुझ को

कोई बरसात का बादल यहाँ बार-ए-दिगर आए
धनक जैसा कोई लम्हा दुबारा चाहिए मुझ को

ख़ुदा-ए-बहर मुझ को पानियों में साँस दी तूँ ने
मगर अब इस समुंदर से किनारा चाहिए मुझ को

अभी तो इक सितारे पर क़दम मैं ने जमाए हैं
अभी तो आसमाँ सारे का सारा चाहिए मुझ को

तिरी ख़्वाहिश के आँगन में हो मेरे प्यार की छाया
मुकम्मल इस हवेली पर इजारा चाहिए मुझ को

अभी 'ज़हराब' उस को देखता हूँ चश्म-ए-हैरत से
अभी दरिया-ए-हैरत का किनारा चाहिए मुझ को