उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kis pe khulta hai bankpan us ka

किस पे खुलता है बाँकपन उस का

کس پہ کھلتا ہے بانکپن اس کا

शायर: Babar Zuhrab7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किस पे खुलता है बाँकपन उस का
है तराशा हुआ बदन उस का

ख़ामुशी भी ख़मोश हो जाए
कहीं सुन ले अगर सुख़न उस का

मैं तुझे देखता नहीं प्यारे
मैं तो बस देखता हूँ फ़न उस का

रौशनी नूर में बदलती है
नाम लेती है जब किरन उस का

ख़ौफ़ आता है आइने से मुझे
सोचता हूँ अकेला-पन उस का

'ऐन मुमकिन है फूल बन जाए
छू लिया जिस ने पैरहन उस का

'क़ैस'-ओ-'ज़हराब' दोनों आशिक़ हैं
दश्त इस का है और बन उस का