उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hijr ka aaina na ho jaana

हिज्र का आइना न हो जाना

ہجر کا آئنہ نہ ہو جانا

शायर: Babar Zuhrab8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हिज्र का आइना न हो जाना
ख़ुद से मिल कर जुदा न हो जाना

मुझ को सच बोलने की 'आदत है
दोस्त मुझ से ख़फ़ा न हो जाना

जब कोई रास्ता न दे तुम को
अपनी जानिब रवाना हो जाना

एहतिमामन बशर न हो सके तो
इंतिक़ामन ख़ुदा न हो जाना

सिल को सीने में कौन रखता है
दिल का हम-क़ाफ़िया न हो जाना

क़फ़स-ए-‘इश्क़ है ये जेल नहीं
क़ैदियो तुम रिहा न हो जाना

आँख खुलते ही सुब्ह धुलते ही
ख़्वाब का बे-ठिकाना हो जाना

गर ज़माना न मिल सके 'ज़हराब'
तुम ख़ुद अपना ज़माना हो जाना