उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil se tumhaari yaad guzara karunga main

दिल से तुम्हारी याद गुज़ारा करूँगा मैं

دل سے تمہاری یاد گزارا کروں گا میں

शायर: Babar Zuhrab7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल से तुम्हारी याद गुज़ारा करूँगा मैं
तन्हाई में भी तुम को पुकारा करूँगा मैं

जो अश्क हिज्र-ए-यार ने बख़्शा है आँख को
कुछ दिन में उस को अपना सितारा करूँगा मैं

तब देखना फ़लक का बदलता हुआ मिज़ाज
जब चाँद को ज़मीं से इशारा करूँगा मैं

क्यों साँस बंद होंगे मिरे मेरे हुक्म से
क्यों बहर-ए-ज़िंदगी से किनारा करूँगा मैं

मैं राह-ए-फ़िक्र-ओ-फ़न से दिया ले के 'इल्म का
गुज़रा करूँगा ख़ुद को गुज़ारा करूँगा मैं

अब मुझ पे अस्ल हार का मतलब खुला है दोस्त
इस खेल में तो जान के हारा करूँगा मैं

ख़ल्क़-ए-ख़ुदा सँवार सके ताकि ख़द्द-ओ-ख़ाल
'ज़हराब' आइने को सँवारा करूँगा मैं