उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamari aankh mein manzar tumhaare raushan hain

हमारी आँख में मंज़र तुम्हारे रौशन हैं

ہماری آنکھ میں منظر تمھارے روشن ہیں

शायर: Babar Zuhrab7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमारी आँख में मंज़र तुम्हारे रौशन हैं
कि जैसे नीले फ़लक पर सितारे रौशन हैं

किसी ने आग लगाई है ठहरे पानी में
सुलग रहा है समुंदर किनारे रौशन हैं

ये सौत है कि 'अलामत है शम'-ए-महफ़िल की
ये लफ़्ज़ हैं कि नए इस्ति'आरे रौशन हैं

सँभल के मुझ को क़दम रखना होंगे दुनिया में
किनाया-कार है वो आँख इशारे रौशन है

कहीं कहीं तो वो लौ सर उठाने लगती है
कभी कभी तो ये लगता है सारे रौशन हैं

किसी ने झोंक दिया है बदन की दोज़ख़ में
तमाम शो'ले तमामी शरारे रौशन हैं

मुझे जलाना नहीं पड़ता अपना दिल 'ज़हराब'
ख़ुदा का शुक्र है मेरे नज़ारे रौशन हैं