उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kase mein apne chand sitare liye hue

कासे में अपने चाँद सितारे लिए हुए

کاسے میں اپنے چاند ستارے لیے ہوئے

शायर: Babar Zuhrab7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कासे में अपने चाँद सितारे लिए हुए
दरवेश चल रहा है ख़सारे लिए हुए

किस इंतिज़ार में है ख़ुदा जाने आइना
क़ब्ज़े में नैन-नक़्श हमारे लिए हुए

गाड़ी के नीचे आ गया इक बाप का ग़ुरूर
बच्चों के मन-पसंद ग़ुबारे लिए हुए

लहरें पलट रही हैं उसे छू के ख़्वाब में
दरिया सिमट रहा है किनारे लिए हुए

हम भी गुज़र रहे हैं तुम्हारे फ़िराक़ से
आँखों में आँसुओं के शरारे लिए हुए

सादा-मिज़ाज लोग समझते नहीं मगर
वो आँख है हज़ार इशारे लिए हुए

दिल दब रहा है बार-ए-मोहब्बत में आज-कल
'ज़हराब' ख़्वाहिशों के सहारे लिए हुए