उर्दू शायरी · ग़ज़ल

safar hi karna hai lazim to mat thakan gira

सफ़र ही करना है लाज़िम तो मत थकान गिरा

سفر ہی کرنا ہے لازم تو مت تھکان گرا

शायर: Nadeem Ajmal Adeem6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सफ़र ही करना है लाज़िम तो मत थकान गिरा
ज़मीं लपेट मिरे सर पे आसमान गिरा

मिरे वुजूद के दीवार-ओ-दर हिला और फिर
मिरे ख़याल की हद पर कोई चटान गिरा

मैं शब-गज़ीदा जो कल रात घर को लौट आया
मिरा दो-ज़ानू पे सर सर पे साएबान गिरा

मैं बा-नसीब हूँ कितना ये जान ले तू भी
कि पहले धूप तनी मुझ पे फिर मकान गिरा

मैं वो फ़क़ीर हूँ लफ़्ज़ों का जिस के हाथों से
ख़याल छूटा कहीं चाक पर गुमान गिरा

मिरी कहानी में ऐ मेरे कातिब-ए-तहरीर
तू मेरा 'इज्ज़ बिखेर और इस का मान गिरा