उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sad-rang ghubar dekhta hun

सद-रंग ग़ुबार देखता हूँ

صد رنگ غبار دیکھتا ہوں

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सद-रंग ग़ुबार देखता हूँ
सहरा की बहार देखता हूँ

इस कर्ब में कौन साथ देगा
लफ़्ज़ों को पुकार देखता हूँ

खोया हुआ चाँद इसी में होगा
इस शब को बुहार देखता हूँ

इक ज़र्द नहीफ़ पेड़ से मैं
जंगल का हिसार देखता हूँ

तख़रीब के देखता हूँ मंज़र
दुनिया का मज़ार देखता हूँ

इक क़तरे से इज़्न-ए-ख़ास ले कर
पानी का दयार देखता हूँ

कोई तो है अंदरून मेरे
मल्बूस उतार देखता हूँ