उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sach hai ya phir mughaalta hai mujhe

सच है या फिर मुग़ालता है मुझे

سچ ہے یا پھر مغالطہ ہے مجھے

शायर: Balwan Singh Azar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सच है या फिर मुग़ालता है मुझे
कोई आवाज़ दे रहा है मुझे

मैं तो पहले से ही ज़रा सा था
हिज्र ने और खा लिया है मुझे

एक उम्मीद जाग उठती है
आसमाँ जब भी देखता है मुझे

ये मरासिम बहुत पुराने हैं
दश्त सदियों से जानता है मुझे

मेरी जानिब भी आ ज़रा फ़ुर्सत
अपने बारे में सोचना है मुझे