उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sabz KHwahish pe panw dharte hue

सब्ज़ ख़्वाहिश पे पाँव धरते हुए

سبز خواہش پہ پاؤں دھرتے ہوئے

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सब्ज़ ख़्वाहिश पे पाँव धरते हुए
धूप-रस्तों से हम गुज़रते हुए

नूर-दरिया में हम उतरते हुए
'मीर' के शे'र हिफ़्ज़ करते हुए

पा लिया हम ने रौशनी का सुराग़
लफ़्ज़ को हर्फ़-हर्फ़ करते हुए

कितने मौसम गँवा दिए हम ने
एक रुत का तवाफ़ करते हुए

क्या मुलाक़ात रूह से भी हुई
उस बदन-दश्त से गुज़रते हुए

उस ने खोला नहीं दर-ए-इम्काँ
वो सिमटता गया बिखरते हुए

सोचता हूँ कि कोई देख न ले
ख़ुद से मिलता भी हूँ तो डरते हुए