उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sab parindon ke dilon mein wahi ek Dar kyon hai

सब परिंदों के दिलों में वही इक डर क्यों है

سب پرندوں کے دلوں میں وہی اک ڈر کیوں ہے

शायर: Parveen Shaghaf4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सब परिंदों के दिलों में वही इक डर क्यों है
फिर से सय्याद की आहट का वो मंज़र क्यों है

क्यों भुलाई नहीं जाती वो मसाफ़त हम से
आज भी तिश्ना-लबी रूह के अंदर क्यों है

मेरी आँखों ने ये पूछा था कि दुनिया तेरी
तेरे हँसते हुए ख़्वाबों के बराबर क्यों है

फूल पतझड़ में भी खिलते हुए देखे होंगे
गर नहीं देखे 'शग़फ़' दिल में ये मंज़र क्यों है