उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sab ke aage nahin bikharna hai

सब के आगे नहीं बिखरना है

سب کے آگے نہیں بکھرنا ہے

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सब के आगे नहीं बिखरना है
अब जुनूँ और तरह करना है

क्या ज़रूरत है इतने ख़्वाबों की
दश्त-ए-शब ही तो पार करना है

आ गए ज़िंदगी के झाँसे में
ठान रक्खा था आज मरना है

पूछना चाहिए था दरिया को
डूबना है कि पार उतरना है

हम को ताकीद कर रहा है बदन
रूह की ज़ात से मुकरना है

बैंड-बाजा है थोड़ी देर का बस
रात भर किस को रक़्स करना है