उर्दू शायरी · ग़ज़ल

saya nahin hai dur tak sae mein aaen kis tarah

साया नहीं है दूर तक साए में आएँ किस तरह

سایہ نہیں ہے دور تک سائے میں آئیں کس طرح

शायर: Qamar Jameel4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

साया नहीं है दूर तक साए में आएँ किस तरह
हम आ गए हैं किस तरफ़ तुम को बताएँ किस तरह

ये फूल पत्ते चाँदनी ये सूरतें मन-मोहनी
ऐसे में अपनी जांकनी उन से छुपाएँ किस तरह

'आलम बहाराँ का सही मंज़र गुलिस्ताँ का सही
बस्ती बयाबाँ की सही दामन बचाएँ किस तरह

जिस फूल की हर पंखुड़ी होती है मोती की लड़ी
उस फूल की ख़ातिर कभी आँसू बहाएँ किस तरह