उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apne sab chehre chhupa rakkhe hain aaine mein

अपने सब चेहरे छुपा रक्खे हैं आईने में

اپنے سب چہرے چھپا رکھے ہیں آئینے میں

शायर: Qamar Jameel4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपने सब चेहरे छुपा रक्खे हैं आईने में
मैं ने कुछ फूल खिला रक्खे हैं आईने में

तुम भी दुनिया को सुनाते हो कहानी झूटी
मैं ने भी पर्दे गिरा रक्खे हैं आईने में

फिर निकल आएगी सूरज की सुनहरी ज़ंजीर
ऐसे मौसम भी उठा रक्खे हैं आईने में

मैं ने कुछ लोगों की तस्वीर उतारी है 'जमील'
और कुछ लोग छुपा रक्खे हैं आईने में