उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek ajab shahzada mere baghon ka

एक अजब शहज़ादा मेरे बाग़ों का

ایک عجب شہزادہ میرے باغوں کا

शायर: Qamar Jameel4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक अजब शहज़ादा मेरे बाग़ों का
देखो आया मौसम सुर्ख़ चराग़ों का

नाच रही है एक शजर पर सारी बहार
और यहाँ भी शोर बहुत है ज़ाग़ों का

दिल के अंदर झगड़ा देखने वालों में
दिल के अंदर मेला एक चराग़ों का

देखो अब भी मेरे महल में रहता है
एक अजब वीराना मेरे दाग़ों का