उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaj sitare aangan mein hain un ko ruKHsat mat karna

आज सितारे आँगन में हैं उन को रुख़्सत मत करना

آج ستارے آنگن میں ہیں ان کو رخصت مت کرنا

शायर: Qamar Jameel4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आज सितारे आँगन में हैं उन को रुख़्सत मत करना
शाम से मैं भी उलझन में हूँ तुम भी ग़फ़लत मत करना

हर आँगन में दिए जलाना हर आँगन में फूल खिलाना
इस बस्ती में सब कुछ करना हम से मोहब्बत मत करना

अजनबी मुल्कों अजनबी लोगों में आ कर मालूम हुआ
देखना सारे ज़ुल्म वतन में लेकिन हिजरत मत करना

उस की याद में दिन भर रहना आँसू रोके चुप साधे
फिर भी सब से बातें करना उस की शिकायत मत करना