उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek patthar ki dast-e-yar mein hai

एक पत्थर कि दस्त-ए-यार में है

ایک پتھر کہ دست یار میں ہے

शायर: Qamar Jameel5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक पत्थर कि दस्त-ए-यार में है
फूल बनने के इंतिज़ार में है

अपनी नाकामियों पे आख़िर-ए-कार
मुस्कुराना तो इख़्तियार में है

हम सितारों की तरह डूब गए
दिन क़यामत के इंतिज़ार में है

अपनी तस्वीर खींचता हूँ मैं
और आईना इंतिज़ार में है

कुछ सितारे हैं और हम हैं 'जमील'
रौशनी जिन से रहगुज़ार में है