उर्दू शायरी · ग़ज़ल

roz ye KHwab Daraata hai mujhe

रोज़ ये ख़्वाब डराता है मुझे

روز یہ خواب ڈراتا ہے مجھے

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रोज़ ये ख़्वाब डराता है मुझे
कोई साए लिए जाता है मुझे

ये सदा काश उसी ने दी हो
इस तरह वो ही बुलाता है मुझे

देखना चाहता हूँ गुम हो कर
क्या कोई ढूँढ के लाता है मुझे

मैं कि इक जाम-ए-तही हूँ और वक़्त
जुर'आ-जुर'आ पिए जाता है मुझे

मैं खिंचा जाता हूँ सहरा की तरफ़
यूँ तो दरिया भी बुलाता है मुझे

'इश्क़ बीनाई बढ़ा देता है
जाने क्या क्या नज़र आता है मुझे