उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raushni si kabhi kabhi dil mein

रौशनी सी कभी कभी दिल में

روشنی سی کبھی کبھی دل میں (ردیف .. ے)

शायर: Hafeez Hoshiarpuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रौशनी सी कभी कभी दिल में
मंज़िल-ए-बे-निशाँ से आती है

लौट कर नूर की किरन जैसे
सफ़र-ए-ला-मकाँ से आती है

नौ-ए-इंसाँ है गोश-बर-आवाज़
क्या ख़बर किस जहाँ से आती है

अपनी फ़रियाद बाज़गश्त न हो
इक सदा आसमाँ से आती है

तख़्ता-ए-दार है कि तख़्ता-ए-गुल
बू-ए-ख़ूँ गुल्सिताँ से आती है

दिल से आती है बात लब पे 'हफ़ीज़'
बात दिल में कहाँ से आती है