उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab koi aarzu nahin zauq-e-payam ke siwa

अब कोई आरज़ू नहीं शौक़-ए-पयाम के सिवा

اب کوئی آرزو نہیں ذوق پیام کے سوا

शायर: Hafeez Hoshiarpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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अब कोई आरज़ू नहीं शौक़-ए-पयाम के सिवा
अब कोई जुस्तुजू नहीं शौक़-ए-सलाम के सिवा

कोई शरीक-ए-ग़म नहीं अब तिरी याद के बग़ैर
कोई अनीस-ए-दिल नहीं अब तिरे नाम के सिवा

तेरी निगाह-ए-मस्त से मुझ पे ये राज़ खुल गया
और भी गर्दिशें हैं कुछ गर्दिश-ए-जाम के सिवा

ख़्वाहिश-ए-आरज़ू सही हासिल-ए-ज़िंदगी मगर
हासिल-ए-आरज़ू है क्या सोज़-ए-मुदाम के सिवा

आह कोई न कर सका चारा-ए-तल्ख़ी-ए-फ़िराक़
नाला-ए-सुब्ह के बग़ैर गिर्या-ए-शाम के सिवा

रंग-ए-बहार पर न भूल बू-ए-चमन से दर-गुज़र
ये भी हैं ख़ुश-नुमा फ़रेब दाना-ओ-दाम के सिवा

मर के हयात-ए-जाविदाँ इश्क़ को मिल गई 'हफ़ीज़'
जी के हवस को क्या मिला मर्ग-ए-दवाम के सिवा