उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaj unhen kuchh is tarah ji khol kar dekha kiye

आज उन्हें कुछ इस तरह जी खोल कर देखा किए

آج انہیں کچھ اس طرح جی کھول کر دیکھا کئے

शायर: Hafeez Hoshiarpuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आज उन्हें कुछ इस तरह जी खोल कर देखा किए
एक ही लम्हे में जैसे उम्र-भर देखा किए

दिल अगर बेताब है दिल का मुक़द्दर है यही
जिस क़दर थी हम को तौफ़ीक़-ए-नज़र देखा किए

ख़ुद-फ़रोशाना अदा थी मेरी सूरत देखना
अपने ही जल्वे ब-अंदाज़-ए-दिगर देखा किए

ना-शनास-ए-ग़म फ़क़त दाद-ए-हुनर देते रहे
हम मता-ए-ग़म को रुस्वा-ए-हुनर देखा किए

देखने का अब ये आलम है कोई हो या न हो
हम जिधर देखा किए पहरों उधर देखा किए

हुस्न को देखा है मैं ने हुस्न की ख़ातिर 'हफ़ीज़'
वर्ना सब अपना ही मेयार-ए-नज़र देखा किए