उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raqsan ye kaenat hai chal raqs karte hain

रक़्साँ ये काएनात है चल रक़्स करते हैं

رقصاں یہ کائنات ہے چل رقص کرتے ہیں (ردیف .. ے)

शायर: Vikram6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रक़्साँ ये काएनात है चल रक़्स करते हैं
हर एक शय नशात है चल रक़्स करते हैं

हम सारे लोग नाचते ज़िंदाँ में क़ैद हैं
सो रक़्स ही नजात है चल रक़्स करते हैं

होते ही सुब्ह दार पे जाएँगे हम सभी
लेकिन अभी तो रात है चल रक़्स करते हैं

फिर से वही है दश्त वही प्यास और हम
फिर से वही फ़ुरात है चल रक़्स करते हैं

गिर्दाब-ए-बहर-ए-इश्क़ बहुत दूर है तो क्या
ग़म का बगूला साथ है चल रक़्स करते हैं

धक धक की धुन पे रक़्स-कुनाँ है अभी भी दिल
ये कम क्या इल्तिफ़ात है चल रक़्स करते है