उर्दू शायरी · ग़ज़ल

riha karun to meri dastaras mein aata hai

रिहा करूँ तो मिरी दस्तरस में आता है

رہا کروں تو مری دسترس میں آتا ہے

शायर: Faizan Umar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रिहा करूँ तो मिरी दस्तरस में आता है
उड़ान छोड़ के पंछी क़फ़स में आता है

बरस लगा है हर इक दिन फ़िराक़ का हम को
पर अब फ़िराक़ का दिन भी बरस में आता है

ग़ज़ल क़लम से बदन में उतर गई ऐसे
कि जैसे ख़ून मिरे दिल से नस में आता है

मुझे शदीद मोहब्बत थी उस से और उस को
ज़रा सा 'इश्क़ था वो भी हवस में आता है