उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghaflat mein ji raha hai tu is be-ruKHi ke sath

ग़फ़्लत में जी रहा है तू इस बे-रुख़ी के साथ

غفلت میں جی رہا ہے تو اس بے رخی کے ساتھ

शायर: Faizan Umar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़फ़्लत में जी रहा है तू इस बे-रुख़ी के साथ
जैसे तिरे बग़ैर हूँ मैं तीरगी के साथ

मैं ने कहा मज़ाक़ में तो ज़िंदगी है यार
फिर हो गया मज़ाक़ मिरी ज़िंदगी के साथ

ख़ाना-ब-दोश लोग हैं मरते हैं भूक से
ग़ुर्बत मिली है तोहफ़ा हमें बे-घरी के साथ

मैं मुब्तला हूँ हिज्र में और वस्ल में रक़ीब
मैं इक बला के साथ हूँ वो इक परी के साथ

मेरे सहारे उस ने गुज़ारा है बस समय
बन कर रहा हूँ सेल मैं जैसे घड़ी के साथ

वो शख़्स मेरे दिल से है ऐसे जुड़ा हुआ
जैसे जुड़ा है दर्द मिरी शा'इरी के साथ

मछली बग़ैर पानी तड़पती है जिस तरह
उस तरह मैं रहा हूँ तुम्हारी कमी के साथ