उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHayal bandh ke lata hai jab qalam mera

ख़याल बाँध के लाता है जब क़लम मेरा

خیال باندھ کے لاتا ہے جب قلم میرا

शायर: Faizan Umar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़याल बाँध के लाता है जब क़लम मेरा
वरक़ पे होता है उस वक़्त ग़म रक़म मेरा

ग़ज़ल लिखूँ मैं तभी दर्द मेरा ज़ाहिर हो
बस इक कलाम का मोहताज है अलम मेरा

दबाव ख़ून का बढ़ता है जब भी बढ़ता है
तिरी गली की तरफ़ एक भी क़दम मेरा

तिरे बिछड़ने पे दुख तो हुआ था लेकिन फिर
खुली जो नींद तो आया था दम में दम मेरा

सज़ा से बचने को मुल्हिद ने क़ाज़ी से ये कहा
कोई क़ुसूर नहीं है ख़ुदा क़सम मेरा

ग़ज़ल-लिखाई के हैं दर्ज ज़ैल तीन अस्बाब
उदास शाम तिरा हिज्र और ग़म मेरा

किसी ने बज़्म में पूछा कलाम किस का है
तो मैं ने हाथ उठाया कि मोहतरम मेरा