उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na chahte hue dil kaam par lagata hun

न चाहते हुए दिल काम पर लगाता हूँ

نہ چاہتے ہوئے دل کام پر لگاتا ہوں (ردیف .. و)

शायर: Faizan Umar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न चाहते हुए दिल काम पर लगाता हूँ
लगा भी लूँ तो बहुत मुख़्तसर लगाता हूँ

पुराने दर्द पे लिखता हूँ अब नए अश'आर
कि सूखे पेड़ पे ताज़ा समर लगाता हूँ

मरा था क़ैदी परिंदा कई बरस पहले
कई बरस से उसी दिन शजर लगाता हूँ

'उमैर-नजमी को सुनता हूँ रंज और ग़म में
मैं इक दवाई कई ज़ख़्म पर लगाता हूँ

हूँ ख़ानदान से अपने मैं दूसरा शा'इर
सो अपने नाम के आगे 'उमर' लगाता हो