उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh waqt uske samne main kya dukhi raha

कुछ वक़्त उस के सामने मैं क्या दुखी रहा

کچھ وقت اس کے سامنے میں کیا دکھی رہا

शायर: Faizan Umar8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ वक़्त उस के सामने मैं क्या दुखी रहा
वो शख़्स उस के बा'द हमेशा दुखी रहा

दोनों ने साथ मिल के मुकम्मल किया फ़िराक़
आधा उदास मैं था वो आधा दुखी रहा

इक शख़्स आइने में है ऐसा भी वाक़'ई
जो मेरे ग़म में मुझ से ज़ियादा दुखी रहा

अल्लाह तुझ को वस्ल में इतना ही ख़ुश रखे
'फैज़ान' तेरे हिज्र में जितना दुखी रहा

बस दो 'अमल किए हैं तिरे हिज्र में हसीन
महफ़िल मैं या तो शे'र पढ़ा या दुखी रहा

इक 'उम्र हँस के काट दी लेकिन फिर एक बार
मुझ को पता चला वो दुखी था दुखी रहा

शिद्दत दुखों की देख के कहने लगा तबीब
मर जाएगा जो इस से ज़ियादा दुखी रहा

'अर्से के बा'द इस को बदल कर 'उमर' किया
पहले-पहल तो नाम भी मेरा दुखी रहा