उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhko pata hai karti hai barbaad shairi

मुझ को पता है करती है बर्बाद शा'इरी

مجھ کو پتہ ہے کرتی ہے برباد شاعری

शायर: Faizan Umar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझ को पता है करती है बर्बाद शा'इरी
फिर भी बनी हुई है मिरी खाद शा'इरी

रिश्ता हुआ है ख़त्म मगर अब तलक मिरी
पहली पसंद तो है तिरे बा'द शा'इरी

उस को पसंद है मिरी बातें सुने वो और
बातों के बीच बीच में इक आध शा'इरी

काफ़ी है चार जुज़्व जगाने को रात भर
रोज़ी का ग़म फ़िराक़ तिरी याद शा'इरी