उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kabhi na hota tha dil par asar udasi ka

कभी न होता था दिल पर असर उदासी का

کبھی نہ ہوتا تھا دل پر اثر اداسی کا

शायर: Faizan Umar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कभी न होता था दिल पर असर उदासी का
पर अब किया है इसी दिल को घर उदासी का

ग़ज़ल हुई है हमेशा उदास रहने पर
बराह-ए-रास्त सुख़न है हुनर उदासी का

कभी सुकूत कभी ख़ौफ़ और कभी वहशत
इस इज़्तिराब में गुज़रा सफ़र उदासी का

दवाई जैसे हर इक दर्द का 'इलाज नहीं
वफ़ा 'इलाज नहीं वैसे हर उदासी का

बड़ा सवाल था दिल में क़याम किस का है
मिरा जवाब रहा मुख़्तसर उदासी का

शदीद ग़म में उदासी ही साथ थी मेरे
ये एक क़र्ज़ है 'फैज़ान' पर उदासी का