उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rabt dil se koi banao tum

रब्त दिल से कोई बनाओ तुम

ربط دل سے کوئی بناؤ تم

शायर: Deepak Kamil8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रब्त दिल से कोई बनाओ तुम
इश्क़ न रंज ही निभाओ तुम

इख़्तिलाफ़ात बा-सलीक़ा हो
ख़ुद गिरो न हमें गिराओ तुम

फागुनी धूप सी तिरी सूरत
मास्क से न इसे छुपाओ तुम

दिल मिरे वो हँसी छलावा है
ख़्वाह-मख़ाह बात न बढ़ाओ तुम

उम्र भर दौड़ती मशीनें हैं
आदमी है कहाँ दिखाओ तुम

गाड़ियाँ ऐश नौकरी पैसा
दोस्ती में इन्हें न लाओ तुम

बाद तेरे चले तिरी हो कर
वो नई दास्ताँ सुनाओ तुम

गाँव माँ सा यही पुकारे है
थक गए हो तो लौट आओ तुम