उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raaz-e-ulfat bata gaya koi

राज़-ए-उल्फ़त बता गया कोई

راز الفت بتا گیا کوئی

शायर: Sabir Abuhari7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

राज़-ए-उल्फ़त बता गया कोई
मुझ को जीना सिखा गया कोई

मेरे दिल में समा गया कोई
उजड़ी बस्ती बसा गया कोई

अपना जल्वा दिखा गया कोई
नूर-ओ-निकहत लुटा गया कोई

किश्त-ए-वीराँ थी ज़िंदगी मेरी
रश्क-ए-जन्नत बना गया कोई

एक आलम है वज्द में गोया
ऐसा नग़्मा सुना गया कोई

हम भी क़ाइल थे ज़ब्त के लेकिन
खोए ऐसे कि पा गया कोई

मस्त रहता हूँ बे-पिए 'साबिर'
मुझ को ऐसी पिला गया कोई