उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raat-bhar fasl-e-bahaar aane ka saman hona

रात-भर फ़स्ल-ए-बहार आने का सामाँ होना

رات بھر فصل بہار آنے کا ساماں ہونا

शायर: Aal-e-Raza Raza6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रात-भर फ़स्ल-ए-बहार आने का सामाँ होना
सुब्ह पौ फटते ही हाथों में गिरेबाँ होना

तुम मिरा हाल न देखो कि मिलेंगी नज़रें
मुझ से देखा नहीं जाएगा पशेमाँ होना

हिज्र और जी के बहल जाने की कोशिश तौबा
मुश्किलें और बग़ैर आप के आसाँ होना

मेरी कश्ती को बहर-हाल है मौजों से लगाव
हो जो हर मौज को है शामिल-ए-तूफ़ाँ होना

छेड़ दी ज़ुल्म की तौजीह सलामत रहिए
शर्म आई भी तो आया न पशेमाँ होना

अपने ही दिल में खिले फूल से कहता है 'रज़ा'
तू जहाँ है उसे रास आए गुलिस्ताँ होना