उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rah par un ko laga lae to hain baaton mein

राह पर उन को लगा लाए तो हैं बातों में

راہ پر ان کو لگا لائے تو ہیں باتوں میں

शायर: Dagh Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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राह पर उन को लगा लाए तो हैं बातों में
और खुल जाएँगे दो चार मुलाक़ातों में

अब्र-ए-रहमत ही बरसता नज़र आया ज़ाहिद
ख़ाक उड़ते कभी देखी न ख़राबातों में

तुम्हीं इंसाफ़ से ये हज़रत-ए-नासेह कह दो
लुत्फ़ इन बातों में आता है कि उन बातों में

ऐसी तक़रीर सुनी थी न कभी शोख़-ओ-शरीर
तेरी आँखों के भी फ़ित्ने हैं तिरी बातों में

अह्द-ए-जमशेद में था लुत्फ़-ए-मय-ओ-अब्र-ओ-हवा
कब ये माशूक़ थे उस वक़्त की बरसातों में

भेजे देता है उन्हें इश्क़ मता-ए-दिल-ओ-जाँ
एक सरकार लुटी जाती है सौग़ातों में

वो गए दिन जो रहे याद बुतों की ऐ 'दाग़'
रात-भर अब तो गुज़रती है मुनाजातों में