उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaKHir ko ishq kufr se iman ho gaya

आख़िर को इश्क़ कुफ़्र से ईमान हो गया

آخر کو عشق کفر سے ایمان ہو گیا

शायर: Dagh Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आख़िर को इश्क़ कुफ़्र से ईमान हो गया
मैं बुत-परस्तियों से मुसलमान हो गया

मय तो हलाल है जो पिए ढब से बादा-नोश
मैं तौबा कर के और पशेमान हो गया

रिंदान-ए-बे-रिया की है सोहबत किसे नसीब
ज़ाहिद भी हम में बैठ के इंसान हो गया

उस ग़ुंचे में समाई है वहशत ब-रंग-ए-बू
दिल कितनी तंगियों पे बयाबान हो गया

लो ऐ बुतो सुनो कि वो 'दाग़'-ए-सनम-परस्त
मस्जिद में जा के आज मुसलमान हो गया