उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aae bhi to wo munh ko chhupae mere aage

आए भी तो वो मुँह को छुपाए मिरे आगे

آئے بھی تو وہ منہ کو چھپائے مرے آگے

शायर: Dagh Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आए भी तो वो मुँह को छुपाए मिरे आगे
इस तरह से आए कि न आए मिरे आगे

बुझते हुए देखूँगा न मैं दिल की लगी को
कोई न कभी शम्अ' बुझाए मिरे आगे

तेवर यही कहते थे कि ये नाम है मेरा
लिख कर कई हर्फ़ उस ने मिटाए मिरे आगे

बिछड़े हुए मा'शूक़ मिलें सब को इलाही
तन्हा कोई जन्नत में न जाए मिरे आगे

कुछ 'दाग़' का मज़कूर जो आया तो वो बोले
आए थे बुरा हाल बनाए मिरे आगे