उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qissa-e-gham suna hua sa hai

क़िस्सा-ए-ग़म सुना हुआ सा है

قصۂ غم سنا ہوا سا ہے

शायर: Umar Farhat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़िस्सा-ए-ग़म सुना हुआ सा है
ये फ़साना रटा हुआ सा है

शहर में हो रही है शाम कि अब
कोई तूफ़ाँ रुका हुआ सा है

जिस भी मंज़र में वो नज़र आएँ
दिल वहीं पर लगा हुआ सा है

किस ने ये राहज़न नज़र डाली
सारा मंज़र लुटा हुआ सा है

मेरे ज़ख़्मों को छूने वाले तिरा
कोई नाख़ुन बढ़ा हुआ सा है

जल रहा है बदन का हर हिस्सा
दिल मगर कुछ बुझा हुआ सा है